एक सबसे अधिक पढ़ा लिखा समाज भी चुनाव के लिए संवर्गवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाई भतीजावाद, मीट-मुर्गा और दारूवाद में फंसा है। आजकल हर स्तर के चुनाव में यही सब वाद चलते हैं। कभी-कभी लगता है कि अगर इन सब वादों के लिए सम्मिलित रूप से एक शब्द की रचना करनी हो तो ‘चुनाव’ को उस शब्द के रूप में मान्यता दे देनी चाहिए।
Author: chatontea
प्रांतीय अधिवेशन भाग-01
काशीपुर के बाद मेरे व्हट्स ऐप में कोई नोटिफिकेशन नहीं दिख रहा था। मुझे लगा कि नेटवर्क प्रॉब्लम होगी। अफजलगढ़ पहुंचने के बाद भी जब कोई नोटफिकेशन नहीं दिखा तो मुझे संदेह हुआ कि यह कुछ और प्रॉब्लम है। नेटवर्क बार पूरे दिख रहे थे। मैंने वही टोटका अपनाया जो आप भी कई बार आजमा चुके होंगे। ऐसी स्थिति में मोबाइल को स्विच ऑफ किया और फिर ऑन कर दिया। जैसे ही नेट ऑन हुआ लगभग डेढ़ सौ के करीब नोटिफिकेशन मेरा इंतजार कर रहे थे। व्हट्स ऐप खोला तो चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। छुट्टी पर असमंजस की स्थिति बन गयी थी। महानिदेशक का आदेश देखा तो थोड़ी देर मैं भी असमंजस में पड़ गया। मुझे लगा कि मुझे गाड़ी से उतर लेना चाहिये और वापस लौट जाना चाहिये। मैंने तय किया कि आगे जो भी स्टेशन आयेगा, वहीं उतर जाऊंगा। गाड़ी अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी। […]
खिलाफ मत बोलो…
उत्तरवन के राजा पिंटू शेर की, जंगल के अधिकांश जानवर बड़ी तारीफ करते थे। कोई कहता-“राजा जी, आपके जैसा राजा, इस उत्तरवन को आज से पहले कभी मिला ही नहीं। आप ने सच में हमारा दिल जीत लिया।”कोई कहता- “राजा जी, हम आपकी कार्यशैली के बड़े कायल हैं। जब आप राजा नहीं थे तब भी आपने जो कार्य किए वह उत्तरवन के लिए बहुमूल्य थाती हैं।”हालाँकि तारीफ करने वालों से कोई पूछ लेता कि कौन-कौन से कार्य किए, थोड़ा प्रकाश डाल पाएंगे ? तो शायद ही वह कोई जबाब दे पाते।राजा जब भी अपनी तारीफ सुनते तो फूले नहीं समाते। सोशल मीडिया में भी वह केवल उन्हीं पोस्ट्स को पढ़ना पसन्द करते, जो उनकी तारीफ से ओत-प्रोत होती थी। जो भी सोशल मीडिया में उनके खिलाफ पोस्ट्स लिखते, उनकी एक फ़ाइल तैयार करने के लिए वाकायदा कुछ कर्मचारियों को अटैचमेंट पर राजदरबार में रखवा रखा था।…..इंटेलिजेंस टीम ने पाया कि […]
थप्पड़ से डर नहीं लगता है साब, प्यार से लगता है…
उत्तरवन में हंगामा वरपा है कि राज्य के किसी मंत्री ने किसी नागरिक को थप्पड़ जड़ दिया। भाई ! नाश हो इस लोकतंत्र का कि अब एक मंत्री किसी को थप्पड़ भी नहीं मार सकता। अगर उसको यह अधिकार भी नहीं कि वह किसी को कोई थप्पड़ मार सके, तो काहे के मंत्री। अब यह मीडिया वाले भी न, नमक-मिर्च लेकर घूमते रहते हैं, इतनी छोटी सी घटना को इतना टेस्टी बना दिया कि दर्शक भी चटकारे लेकर खा रहे हैं।….भाई! दबंग फ़िल्म देखी थी सबने? चुलबुल पाण्डेय से रज्जो ने क्या कहा था? “थप्पड़ से डर नहीं लगता साब प्यार से लगता है।” तब तो सब ने खूब सीटीयां और ताली बजायी थी।अब मंत्री जी ने थप्पड़ क्या मार दिया? सबको डर लगने लगने लगा है। अरे, जिसने थप्पड़ खाया उस भाई ने फ़िल्म नहीं देखी क्या? अरे, मंत्री जी के थप्पड़ से डर रहे हो यार। अरे, मंत्री […]
हरियाणा की नीति आ रेली है…।
-“ये सर्किट, फोन क्यों नहीं उठा रेला है?”–“कौन है बे।”– “तेरा बाप।”— “अरे, भाई.. भाई।… बोलो भाई, कोई इमरजेंसी है क्या?”– “ये सर्किट, तू जल्दी मुझे परेड ग्राउंड में मिल।”–“भाई, तुम फ़ौज में भर्ती हो गए, तुमने बताया नहीं।”-“नहीं रे, बापू के पार्क, बोले तो गाँधी पार्क के बाजू में जो परेड मैदान है न, उसमें मिल।”— “अभी पहुँचता हूँ भाई।”…………. — “क्यों, क्या हुआ भाई? कुछ टेंशन-वेंशन है? टेंशन नहीं लेने का, मैं हूँ न भाई, बोलो किसको ऊपर भेजने का है।”– “नहीं रे, ऐसा कुछ नहीं। ये सर्किट, हरियाणा से ‘नीति’ आ रेली है।”— “क्या भाई, हरियाणा से ‘नीति’ आ रेली है…? फिर तो बड़ा मजा आएगा भाई। पर भाई….जाह्नवी भाभी को बुरा लगेगा।”– “क्यों रे? जाह्नवी को नीति से क्या लेना देना?”— “लेना देना है भाई, अगर जाह्नवी भाभी ने आपको नीति के साथ देख लिया तो?”– “ये सर्किट, एक लापा दूँगा न, फिर पता चलेगा। अरे, […]