खिलाफ मत बोलो…

उत्तरवन के राजा पिंटू शेर की, जंगल के अधिकांश जानवर बड़ी तारीफ करते थे। कोई कहता-“राजा जी, आपके जैसा राजा, इस उत्तरवन को आज से पहले कभी मिला ही नहीं। आप ने सच में हमारा दिल जीत लिया।”कोई कहता- “राजा जी, हम आपकी कार्यशैली के बड़े कायल हैं। जब आप राजा नहीं थे तब भी आपने जो कार्य किए वह उत्तरवन के लिए बहुमूल्य थाती हैं।”हालाँकि तारीफ करने वालों से कोई पूछ लेता कि कौन-कौन से कार्य किए, थोड़ा प्रकाश डाल पाएंगे ? तो शायद ही वह कोई जबाब दे पाते।राजा जब भी अपनी तारीफ सुनते तो फूले नहीं समाते। सोशल मीडिया में भी वह केवल उन्हीं पोस्ट्स को पढ़ना पसन्द करते, जो उनकी तारीफ से ओत-प्रोत होती थी। जो भी सोशल मीडिया में उनके खिलाफ पोस्ट्स लिखते, उनकी एक फ़ाइल तैयार करने के लिए वाकायदा कुछ कर्मचारियों को अटैचमेंट पर राजदरबार में रखवा रखा था।…..इंटेलिजेंस टीम ने पाया कि […]

थप्पड़ से डर नहीं लगता है साब, प्यार से लगता है…

उत्तरवन में हंगामा वरपा है कि राज्य के किसी मंत्री ने किसी नागरिक को थप्पड़ जड़ दिया। भाई ! नाश हो इस लोकतंत्र का कि अब एक मंत्री किसी को थप्पड़ भी नहीं मार सकता। अगर उसको यह अधिकार भी नहीं कि वह किसी को कोई थप्पड़ मार सके, तो काहे के मंत्री। अब यह मीडिया वाले भी न, नमक-मिर्च लेकर घूमते रहते हैं, इतनी छोटी सी घटना को इतना टेस्टी बना दिया कि दर्शक भी चटकारे लेकर खा रहे हैं।….भाई! दबंग फ़िल्म देखी थी सबने? चुलबुल पाण्डेय से रज्जो ने क्या कहा था? “थप्पड़ से डर नहीं लगता साब प्यार से लगता है।” तब तो सब ने खूब सीटीयां और ताली बजायी थी।अब मंत्री जी ने थप्पड़ क्या मार दिया? सबको डर लगने लगने लगा है। अरे, जिसने थप्पड़ खाया उस भाई ने फ़िल्म नहीं देखी क्या? अरे, मंत्री जी के थप्पड़ से डर रहे हो यार। अरे, मंत्री […]

हरियाणा की नीति आ रेली है…।

-“ये सर्किट, फोन क्यों नहीं उठा रेला है?”–“कौन है बे।”– “तेरा बाप।”— “अरे, भाई.. भाई।… बोलो भाई, कोई इमरजेंसी है क्या?”– “ये सर्किट, तू जल्दी मुझे परेड ग्राउंड में मिल।”–“भाई, तुम फ़ौज में भर्ती हो गए, तुमने बताया नहीं।”-“नहीं रे, बापू के पार्क, बोले तो गाँधी पार्क के बाजू में जो परेड मैदान है न, उसमें मिल।”— “अभी पहुँचता हूँ भाई।”…………. — “क्यों, क्या हुआ भाई? कुछ टेंशन-वेंशन है? टेंशन नहीं लेने का, मैं हूँ न भाई, बोलो किसको ऊपर भेजने का है।”– “नहीं रे, ऐसा कुछ नहीं। ये सर्किट, हरियाणा से ‘नीति’ आ रेली है।”— “क्या भाई, हरियाणा से ‘नीति’ आ रेली है…? फिर तो बड़ा मजा आएगा भाई। पर भाई….जाह्नवी भाभी को बुरा लगेगा।”– “क्यों रे? जाह्नवी को नीति से क्या लेना देना?”— “लेना देना है भाई, अगर जाह्नवी भाभी ने आपको नीति के साथ देख लिया तो?”– “ये सर्किट, एक लापा दूँगा न, फिर पता चलेगा। अरे, […]

बादशाह अकबर द्वितीय और पेपर लीक – भाग-3 (अंतिम किस्त)

“न्यू रत्न जी, आप उन तथ्यों को दरबार के सामने रखें, जिससे यह साबित हो सके कि पेपर लीक होने की बात मिथ्या है।” – बादशाह ने कहा। “जी, अवश्य जहाँपनाह। अगर आपकी इजाजत हो तो मैं कुछ प्रयोगों के आधार पर अपनी बात साबित करने की इजाजत चाहुँगा।” – न्यू रत्न ने कहा। दरबार में बैठे सभी लोगों के साथ-साथ दरबार में उपस्थित सौरत्नों के चेहरों पर कौतुहल साफ देखा जा सकता था। सभी समझने की कोशिश कर रहे थे कि न्यू रत्न क्या करने वाले हैं। “जहाँपनाह, मैं दरबार में कुछ सामग्री पेश करना चाहता हुँ।” – न्यू रत्न ने कहा। “इजाजत है।” बादशाह की समझ में भी कुछ नहीं आ रहा था कि न्यू रत्न क्या करने जा रहे हैं।न्यू रत्न ने ताली बजायी। दरबानों द्वारा दरबार के बीचों-बीच एक मेज रख दी गयी। फिर उसके ऊपर चद्दर से ढकी, एक चौकोर सी दिखने वाली चीज रख […]

बादशाह अकबर द्वितीय और पेपर लीक – भाग-2

दरबार में पेपर लीक की चर्चा के फरमान से सौरत्नों में खलबली मच गयी। सबने अपने-अपने रिश्तेदारों को राज्य के विभिन्न महकमों में सेट कर रखा था। बीरबल को भी उन्होंने ऑफर दिया था कि आपकी बेटे को ‘दरोगा-ए-दरबार’ या ‘दरोगा-ए-मुख्य तोपखाना’ में सेट कर देते हैं। बीरबल ने स्पष्ट मना कर दिया था। बादशाह अकबर द्वितीय का बीरबल द्वितीय पर, विश्वास पुराने अकबर बीरबल जैसा तो नहीं था। पर फिर भी वह परम्परावश उनका मत जरूर जानना चाहते थे।……अन्य रत्न, बीरबल को दरबार में, किसी तरह आने देने से रोकना चाहते थे। एक रत्न ने कहा रोको उसे, नहीं तो हम सबका भांडा फूट जाएगा। कुछ भी करो पर उसको रोको।“बीरबल, कल दरबार में नहीं आ पाएगा। आप लोग चिंता न करें।”- उनमें से एक रत्न ने कहा “वो कैसे?” – कई रत्न एक साथ बोल पड़े। “बताता हुँ, बताता हुँ।” – उसने कहा। “दरअसल बीरबल की तबीयत ख़राब […]