मात्राकरण – भाग-1

आजकल फिर एक बार मात्राकरण का एक आदेश सोशल मीडिया में देखने क़ो मिला। इसमें यह कहा जा रहा है कि जो अतिरिक्त शिक्षक हैं उनको हटा कर दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। पर उसका मानक क्या होना चाहिए? इस पर चर्चा की आवश्यकता है।………प्राप्त जानकारी के अनुसार 60 बच्चों तक का एक सेक्शन मानकर शिक्षकों का मात्राकरण किया जा रहा है। यह मानक कितना उचित है? आज इस पर चर्चा-परिचर्चा करते हैं।……..शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के प्रावधानों के अनुसार –1 – प्राइमरी में छात्र शिक्षक अनुपात 40:1 होना चाहिए ।2 – जूनियर में छात्र शिक्षक अनुपात 35:1 होना चाहिए ।……..हाईस्कूल या इंटरमीडिएट में छात्र शिक्षक अनुपात क्या होगा? इस संबंध में RTE कानून में कोई प्रावधान नहीं है। क्योंकि हाईस्कूल या इंटरमीडिएट इस कानून के दायरे में नहीं आते।……..तो फिर हाईस्कूल या इंटरमीडिएट में छात्र-शिक्षक अनुपात क्या हो? 60 बच्चों पर एक सेक्शन का मानक कितना व्यवहारिक है? […]

एलटी से प्रवक्ता पद में पदोन्नति।

विगत कई वर्षों से एलटी के साथी अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति न होने का कारण वरिष्ठता विवाद बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि 90-91 में तदर्थ नियुक्त कुछ साथी अपनी वरिष्ठता हेतु माननीय उच्च न्यायालय गए हैं। इसलिए पदोन्नति नहीं हो पा रही है। पर वरिष्ठता का विवाद एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति को प्रभावित करता नहीं दिख रहा है। क्यों?……..1- एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति, तकनीकी तौर पर पदोन्नति है ही नहीं। पदोन्नति का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत वरिष्ठता का सिद्धांत होता है। क्योंकि वरिष्ठता का सिद्धांत एक वस्तुनिष्ठ सिद्धांत है, इसलिए अधिकांश जगह इसी को अपनाया जाता है। उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग में पदोन्नति हेतु वरिष्ठता के सिद्धांत को ही अपनाया गया है। जब पदोन्नति का आधार वरिष्ठता निर्धारित है, तो नियमानुसार वरिष्ठ शिक्षक की पदोन्नति पहले होनी चाहिए। (जैसे प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य के मामले में होता है ) परन्तु […]

प्रांतीय अधिवेशन भाग-05

बॉलकनी में भी मुझे काफी देर हो गयी थी। मैं वापस कमरे में लौट आया। थोड़ी देर फोन निकाल कर व्हट्स ऐप चेक किया तो विभिन्न ग्रुपों में चुनाव प्रचार के मैसेज भरे थे। थोड़ी देर फोन चेक करने के बाद मेरी आँखें भारी होने लगी। मुझे महसूस हुआ कि यदि मैं ज्यादा देर बिस्तर में ही रहा तो मुझे नींद आ जायेगी। मैं अभी सोना नहीं चाहता था क्योंकि फिर रात को नींद न आती। पर नींद को कैसे टाला जाय ? मैंने तय किया कि अधिवेशन स्थल को देखकर आया जाय। मैंने होटल के रिसेप्शन में कमरे की चाबी जमा की और रिसेप्शन वाले से लक्ष्मण विद्यालय का पता पूछा। उसने बताया कि रेलवे स्टेशन की पल्ली तरफ गुरु राम राय डिग्री कॉलेज पड़ेगा। उससे आगे चलते रहना उसी साइड में लक्ष्मण विद्यालय पड़ेगा।……….मैंने सड़क पार की और रेलवे स्टेशन की तरफ चल दिया। थोड़ी दूर चलने पर […]

प्रांतीय अधिवेशन – भाग-04

सुशील जी ने अब कोई नया सवाल नहीं किया। पर मैं यह भी नहीं कह सकता कि वह मेरे जबाब से संतुष्ट हुये या नहीं। हमारी चाय समाप्त हो गयी थी। उन दोनों ने मुझसे विदा ली और चले गये। मैंने कहा कल आओगे तो मिलना। मैं थोड़ी देर दुकान में बैठा रहा। क्योंकि मुझे तो कहीं जाना नहीं था। मैंने तय किया कि वापस होटल लौटा जाय।……….मैं होटल के कमरे में लौट आया। अभी मैं धारचूला और देहरादून के वातावरण से सामंजस्य नहीं बिठा पा रहा था। एक अजीब प्रकार की बेचैनी सी हो रही थी। न बिस्तर में लेटा जा रहा था और न ही कुछ और करने का मन कर रहा था। मैं कमरे के बाहर बालकनी में आ गया और बाहर चलती गाड़ियों को देखने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे शहर में कोई आपदा आ गयी हो और लोग जल्दी से जल्दी कहीं […]

प्रांतीय अधिवेशन- भाग-03

“आपके यहाँ से कितने लोग आये हैं ?”- अवनीश ने मुझसे पूछा। “दो। पर वोट एक का है। मैंने भी वहांनिदेशक का आदेश रास्ते में देखा। मैं तो वापस लौट रहा था सोचा चलता ही हूँ।” “हमारे यहाँ से वोट दो का है, पर आये हम चार हैं। हम चारों का घर हरिद्वार व रुड़की है। हमने सोचा कि सम्मेलन में भी शामिल हो लेंगे और घर भी हो लेंगे। चौदह सीएल में तो आणा-जाणा ही हो पाये जी। जब भी घर आणा होता है, एक सीएल आणे में खराब करो, एक जाणे में। फिर दो दिन घर रहो, तो चार सीएल तो लग ही जाती हैं जी। अगर कोई काम पड़ गया, तो आधी सीएल तो एक ही बार में खत्म हो जावें जी। अगर कभी गजीटेड छुट्टियों के साथ जोड़ना चाहो, तो कभी कोई छुट्टी कैंसिल हो जा, कभी कोई। इस दिन अलाणा दिवस मनाना है, उस दिन […]