आज बारिश के कारण स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए उठने की कोई जल्दी नहीं थी। मैंने थोड़ी देर बिस्तर में लेटे लेटे ही बारिश होने की आवाज को सुना और पुनः तसल्ली से लेट गया। मैं दुर्गम में नौकरी करने के इस आनन्द के बारे में सोचने लगा। यहाँ आप जोगी की तरह रहते हैं। अकेले। कोई परिवार का झंझट नहीं है। अब तो फोन हो गया, जब घर से फ़ोन आता है, तो लगता है कि अरे हम कोई जोगी नहीं सांसारिक मनुष्य हैं। वरना जीवन का अधिकांश हिस्सा ऐसे अकेले ही गुज़ार दिया। कोई आपको डिस्टर्ब करने वाला नहीं है। अगर छुट्टी है, तो आपको कोई टोकने वाला नहीं है। कब उठना है, कब खाना है, कब सोना है सब आपकी मर्जी पर निर्भर है। मैं अभी दुर्गम के बेनिफिट्स के बारे में सोच ही रहा था कि दरवाजे पर कुछ आवाज हुयी। मैंने सोचा बन्दर होंगे। क्योंकि […]