बादशाह अकबर द्वितीय और पेपर लीक.

बादशाह अकबर द्वितीय भी अकबर प्रथम की तरह अपना राज-काज चला रहे थे। वह इतिहास के विद्यार्थी रहे हैं। इसलिए उन्होंने थोड़ा बहुत अकबर को पढ़ा था। उनको मालूम था कि अकबर मुझ से भी कम पढ़ा-लिखा था। और मेरी तरह उसकी भी पढ़ने में रूचि कम ही थी। उसकी सफलता में उसके नवरत्नों का बहुत बड़ा हाथ था। अकबर द्वितीय को लगा ज़ब केवल नौ लोगों अर्थात नवरत्नों की सहायता से, अकबर ने इतिहास में महानता का दर्जा हासिल कर लिया था, तो मैं नौ की जगह सौ लोगों की एक टीम बनाऊंगा और वह ‘सौरत्न’ कहलायेंगे।……सौरत्नों की एक टीम बना दी गयी। यह सौरत्न अकबर द्वितीय की इतनी जय जयकार करते कि अकबर आत्म मुग्धता की ओर बढ़ चले। इस जय जयकार में इतना नशा होता कि नये बादशाह अकबर खुद को बादलों में उड़ते महसूस करते। प्रजा भी आनंदित थी। बादशाह की ख़ुशी में ही प्रजा की […]

परीक्षा पर चर्चा…भाग -03 (अंतिम भाग)

सौम्य खरगोश को समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाय? टीवी को बिना स्टैंड के मेज में कैसे स्थिर किया जाय। तनाव के कारण उनको कोई तरीका नहीं सूझ रहा था। तभी सोनू खरगोश जी आते दिखाई दिए। सौम्य की ऑंखें टिमटिमा गयी। दोनों ने मिलकर टीवी रखने की कुछ युक्तियाँ सोची। कई युक्तियाँ सोचने के बाद। एक सही प्रतीत होती युक्ति को फाइनल किया।…..टीवी को मेज के ऊपर न रखकर लकड़ी की कुर्सी पर रखने का निर्णय हुआ। कुर्सी में पहले तीन-चार फोल्ड करके मेजपोस का कपड़ा रखा गया। उसके बाद टीवी को उसके ऊपर रखा। जिससे टीवी फिसले न। फिर टीवी को उसके डिस्प्ले वाले हिस्से को छोड़कर ऊपर और नीचे, रस्सी की सहायता से, कुर्सी की पीठ पर बांध दिया गया। अब टीवी के गिरने के बहुत कम चांस थे। ज़ब तक कोई जानबूझ कर धक्का न मारे।…….अब बच्चे और अन्य स्टॉफ भी पहुँच […]

परीक्षा पर चर्चा…भाग -02

“अब आप लोग आये हो, तो आपके लिए मना करने का सवाल ही नहीं है। टीवी ले जाईये।” – प्रधान जी ने कहा।…..टीवी को दीवाल से निकाल कर, उसके डिब्बे में पैक कर दिया गया। टीवी को ले जाना काफी सरल था। पर दिक्क़त डिश एंटीना को ले जाने में आ गयी। प्रधान जी ने एक पूरे कनस्तर में सीमेंट भर कर एंटीना को फिक्स किया था। वह काफी भारी था। अब समस्या यह आ गयी कि उसको कैसे ले जाँए ? सौम्य खरगोश जी, फिर निराश हो गए। कल रात भर सो न पाने के कारण उनको प्रधान जी के घर पर बैठे-बैठे कई झपकियां आ गयी थी। एक बार तो वह कुर्सी से गिरते-गिरते बचे।…….डिश एंटीना को ले जाने पर चर्चा हुयी। प्रधान जी की धर्मपत्नी ने सुझाव दिया कि वह इस एंटीना को अपने सिर में रखकर स्कूल पहुँचा देगी। दोनों गुरु लोगों को यह उचित महसूस […]

परीक्षा पर चर्चा…भाग -01

उत्तरवन में दो दिन बाद विभाग द्वारा ‘परीक्षा पर चर्चा’ का सीधा प्रसारण टीवी के माध्यम से बच्चों को दिखाया जाना प्रस्तावित है। प्रिंसिपल साहब ने परीक्षा पर चर्चा की सम्पूर्ण व्यवस्था का आदेश सौम्य खरगोश के नाम किया हुआ था। श्रव्य-दृश्य का प्रभार भी सौम्य खरगोश के पास ही था। गतवर्षों में जब परीक्षा पर चर्चा का आयोजन हुआ था। तब रेडियो से काम चल गया था। इस बार प्रिंसिपल साहब नये आ गए थे। उनका आदेश था कि टीवी होना जरूरी है। सौम्य खरगोश जी ने साहब से निवेदन किया कि टीवी की व्यवस्था कर पाना संभव नहीं है। पर साहब ने साफ हिदायत दे दी कि टीवी की व्यवस्था होनी ही चाहिए, मैं कुछ नहीं जानता। सौम्य खरगोश ने साहब से फिर निवेदन किया कि साहब टीवी की व्यवस्था आप कर दें। लगा मैं दूँगा। साहब ने उनके निवेदन को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कह दिया कि […]

ज्योतिर्मठ श्रृंखला -भाग – 01

मैं टीवी के सभी चैनल्स, एक तरफ से दूसरी तरफ तक बदल चुका था। किसी भी चैनल में ऐसा कंटेंट नहीं था जिस पर रुका जा सके।फोन को मैं इतना प्रयोग कर चुका हूँ कि अब नजर कमजोर हो गयी है, ज्यादा देर देखने पर ऑंखें दर्द करने लगती हैं। जब भी ऐसा होता है मुझे चिंता होने लगती है कि आजकल के बच्चों की ऑंखें जल्दी कमजोर हो जाएंगी। फिर मुझे मेरी कल्पना में अधिकांश बच्चे, चश्मे पहने दिखने लगते हैं। बच्चे क्या, अधिकांश लोग चश्मे में दिखने लगते हैं। इससे पहले कि मन कुछ और चिंता वाली फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिखे, मैंने लाइट बंद की और सोने की कोशिश करने लगा।……मैं सोचने लगा की जल्दी नींद आ जाय। पर मन फिर खुरापात में लग गया। उसने एक सवाल और ढूंढ लिया कि आखिर यह नींद आती कहाँ से है ? मैंने मन को बेफालतू सवालों को ढूंढ़ने से […]